
राजधानी पटना में वर्षों पुरानी लीज संपत्तियों को लेकर आज नगर निगम बोर्ड की विशेष बैठक में बड़ा फैसला लिया जा सकता है। बैठक में शहर के नौ प्रमुख इलाकों में मौजूद करीब 432 एकड़ लीज संपत्तियों को फ्री-होल्ड करने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। अगर बोर्ड से प्रस्ताव पारित होता है तो इसे आगे राज्य सरकार और कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति मिलने पर राजेंद्रनगर, कंकड़बाग, श्रीकृष्णापुरी, मीठापुर और ट्रांसपोर्ट नगर से जुड़े इलाकों समेत कई स्थानों पर लंबे समय से लीज पर रह रहे लोगों के लिए संपत्ति पर पूर्ण मालिकाना हक हासिल करने का रास्ता खुल सकता है।
छह दशक पुरानी लीज व्यवस्था से मिलेगी राहत
पटना के इन इलाकों में करीब 60 साल पहले लोगों को प्लॉट, मकान, फ्लैट और दुकानें लीज पर आवंटित की गई थीं। इनमें पटना सुधार न्यास और बाद में पटना क्षेत्रीय विकास प्राधिकार यानी PRDA से जुड़ी संपत्तियां भी शामिल हैं।
समय के साथ इन संपत्तियों का प्रशासनिक नियंत्रण नगर निगम के पास आ गया, लेकिन बड़ी संख्या में संपत्तियां अब तक फ्री-होल्ड नहीं हो सकीं। इसके कारण मालिकों को म्यूटेशन, हस्तांतरण और संपत्ति के अधिकार से जुड़े मामलों में परेशानी उठानी पड़ रही थी।
इन 9 इलाकों की संपत्तियां होंगी शामिल
नगर निगम की ओर से जिन प्रमुख इलाकों की लीज संपत्तियों का आकलन किया गया है, उनका कुल क्षेत्रफल करीब 432 एकड़ है।
- राजेंद्रनगर योजना संख्या-1: 198 एकड़
- कंकड़बाग, PIT कॉलोनी: 5.50 एकड़
- दुजरा, बुद्ध कॉलोनी: 27.70 एकड़
- चितकोहरा, मईचक, बेडर और हरनीचक: 18.03 एकड़
- दीघा, गंगा किनारा: 13 एकड़
- मौर्यालोक व्यावसायिक परिसर: 7.21 एकड़
- श्रीकृष्णापुरी आवासीय कॉलोनी: 64 एकड़
- मीठापुर: 59.69 एकड़
- जकरियापुर: 38.94 एकड़
इनमें आवासीय और व्यावसायिक दोनों तरह की संपत्तियां शामिल हैं।
फ्री-होल्ड के लिए कितना देना होगा शुल्क?
विशेष बैठक में फ्री-होल्ड के लिए निर्धारित शुल्क पर भी महत्वपूर्ण चर्चा होने की संभावना है। प्रस्ताव के अनुसार मूल आवंटी से वर्तमान सर्किल रेट यानी एमबीआर का 10 प्रतिशत, जबकि दूसरे आवंटी से 12 प्रतिशत शुल्क लिया जा सकता है।
शुल्क जमा होने के बाद संबंधित लीज धारक को संपत्ति का फ्री-होल्ड मालिकाना हक देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद बदला प्रस्ताव
इस मामले में 20 अगस्त 2024 का हाईकोर्ट का आदेश भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने नगर निगम की ओर से 50 फीसदी लाभांश की मांग को अवैध बताते हुए खारिज कर दिया था।
इसके बाद फ्री-होल्ड के लिए अपेक्षाकृत कम शुल्क रखने की दिशा में आगे बढ़ा गया। इससे वर्षों से लीज संपत्ति रखने वाले लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
निगम को 150-200 करोड़ रुपये की आमदनी का अनुमान
लीज संपत्तियों को फ्री-होल्ड करने से सिर्फ संपत्ति मालिकों की समस्या दूर होने की उम्मीद नहीं है, बल्कि नगर निगम को भी बड़ा राजस्व मिल सकता है।
निगम प्रशासन के अनुमान के मुताबिक पूरी प्रक्रिया से करीब 150 से 200 करोड़ रुपये तक राजस्व प्राप्त हो सकता है। अदालतों में चल रहे विवाद और मुकदमों के कारण निगम को लंबे समय से राजस्व संबंधी नुकसान उठाना पड़ रहा था।
इसी वजह से बिहार राज्य आवास बोर्ड और BIADA की तर्ज पर लीज संपत्तियों को फ्री-होल्ड करने की नीति पर काम किया जा रहा है।
पहले भी उठे थे संपत्तियों के ब्योरे पर सवाल
नगर निगम की पिछली बोर्ड बैठक में लीज संपत्तियों का पूरा विवरण संलेख में शामिल नहीं होने को लेकर पार्षदों ने आपत्ति जताई थी। इसके बाद अब विशेष बैठक बुलाकर प्रस्ताव और संबंधित विवरण पर दोबारा विस्तार से चर्चा की जा रही है।
बोर्ड की मंजूरी के बाद भी सरकार की अनुमति जरूरी
विशेष बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी मिलना अंतिम फैसला नहीं होगा। नगर निगम बोर्ड से स्वीकृति मिलने के बाद प्रस्ताव को राज्य सरकार और कैबिनेट के पास भेजा जाएगा। सरकार की मंजूरी के बाद ही फ्री-होल्ड की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा सकेगा।
अगर प्रस्ताव लागू हो जाता है तो पटना के कई पुराने इलाकों में रहने वाले हजारों परिवारों की दशकों पुरानी परेशानी कम हो सकती है। फ्री-होल्ड के बाद संपत्ति के हस्तांतरण, दाखिल-खारिज और मालिकाना हक से जुड़े मामलों में भी ज्यादा स्पष्टता आने की उम्मीद है।
यानी नगर निगम की आज की विशेष बैठक पटना की करीब 432 एकड़ लीज संपत्तियों के भविष्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। बोर्ड की मुहर और सरकार की मंजूरी मिलने पर छह दशक पुरानी लीज व्यवस्था से निकलकर ये संपत्तियां स्थायी मालिकाना हक की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।



