
बिहार के कृषि मंत्री विजय सिन्हा ने गया के सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट कर दिया है कि राज्य की राजनीति अब जाति, धर्म और लिंग के आधार पर समाज को बांटने के बजाय, विकास और जनकल्याण के मुद्दों पर आगे बढ़ेगी। विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि बिना संघर्ष के बड़े राजनीतिक पदों तक पहुंचने वाले लोग जमीन की वास्तविक समस्याओं को कभी नहीं समझ सकते हैं।कृषि मंत्री ने तुष्टिकरण की राजनीति को समाज के लिए बेहद नुकसानदेह बताते हुए कहा कि बिहार को अब केवल विकास की राजनीति की सख्त जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश और सूबे में अब केवल चार ही मुख्य जातियां हैं— गरीब, युवा, महिला और किसान। अब सरकार की हर योजना और राजनीति का मुख्य केंद्र बिंदु यही वर्ग होंगे।किसानों की आय बढ़ाने, उन्हें बिचौलियों से बचाने और आधुनिक खेती से जोड़ने के लिए सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने और उन्हें ‘खेत से बाजार’ तक सीधा जोड़ने के लिए किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को निरंतर मजबूत किया जा रहा है। वहीं, राज्य में मंडराते जल संकट को देखते हुए ‘लैब से लैंड’ की विशेष रणनीति अपनाई गई है। इसके तहत कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाले बीजों और आधुनिक कृषि तकनीकों को सीधे प्रयोगशाला से निकालकर किसानों के खेतों तक पहुंचाया जा रहा है।कृषि क्षेत्र में हुए नवाचारों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि विभाग ने 33 एकड़ में बिना मोरी (नर्सरी) के सीधी धान बुआई का सफल प्रयोग किया है। अब इसे अन्य किसानों के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में पेश किया जाएगा। किसानों की समस्याओं के प्रति सरकार की गंभीरता स्पष्ट करते हुए उन्होंने कड़ा निर्देश दिया है कि बीज, खाद या किसी भी सरकारी कृषि योजना से जुड़ी शिकायत मिलने पर विभाग द्वारा 24 घंटे के भीतर त्वरित और सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि सरकार की सभी नई योजनाओं के केंद्र में मुख्य रूप से भूमिहीन कृषि श्रमिक और छोटे किसान शामिल हैं और इसके साथ ही राज्य की सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।



