
नालंदा जिले के बिहारशरीफ प्रखंड स्थित तेतरावां पईन के जीर्णोद्धार के बाद अब इसकी सिंचाई क्षमता 430 हेक्टेयर तक हो गई है। इससे किसानों को बेहतर और नियमित सिंचाई सुविधा मिल रही है। सिंचाई की बेहतर व्यवस्था से खेती अधिक सुरक्षित, उत्पादक और लाभदायक बन रही है।
स्थानीय निवासी अरुण सिंह बताते हैं, “हजारों बीघा खेत में पटवन की समस्या नहीं हो रही है। किसान काफी खुश हैं और मुनाफा भी ज्यादा हो रहा है।”
सिर्फ नालंदा ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार में किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने और सिंचाई सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए बिहार सरकार लगातार काम कर रही है। आहर-पईन और तालाब जैसे पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार से जल संचयन को बढ़ावा मिल रहा है। साथ ही, किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
बिहार की 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। किसान राज्य के विकास की रीढ़ हैं। ऐसे में बिहार सरकार के विकास कार्यों में कृषि और किसानों का विकास महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार राज्य के अन्नदाताओं की आय बढ़ाने और खेती को आधुनिक बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है।
इसी कड़ी में ‘हर खेत तक सिंचाई का पानी’ योजना महत्वपूर्ण है। बिहार सरकार के ‘सात निश्चय-2’ कार्यक्रम के तहत यह योजना चलाई जा रही है। इसका लक्ष्य राज्य के सभी खेतों तक सिंचाई की सुविधा पहुंचाना है।
गौरतलब है कि 19 अगस्त की कैबिनेट बैठक में बिहार में हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचाने की दिशा में सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ‘मुख्यमंत्री निजी नलकूप योजना’ के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में 11,000 निजी नलकूपों की स्थापना के लिए 305.60 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।
योजना के तहत निजी नलकूपों की स्थापना से किसानों को सिंचाई के लिए बेहतर जल सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। इससे खेतों तक पानी की पहुंच बढ़ने और कृषि कार्यों को मजबूती मिलने की उम्मीद है। योजना का उद्देश्य सिंचाई सुविधाओं का विस्तार कर किसानों को लाभ पहुंचाना और कृषि उत्पादन को बढ़ावा देना है।
जून 2026 में राज्य सरकार ने ‘हर खेत तक सिंचाई का पानी’ कार्यक्रम को 2030 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। बिहार के लघु जल संसाधन मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने प्रेस वार्ता में बताया था कि भविष्य की सिंचाई जरूरतों को पूरा करने के लिए उप विकास आयुक्त (DDC) की अध्यक्षता में विशेष समिति गठित कर राज्यभर में सतही सिंचाई योजनाओं का सघन सर्वेक्षण कराया गया। सर्वे के आधार पर 7,014 नई योजनाओं को चिह्नित किया गया है। इन योजनाओं को चरणबद्ध तरीके से लागू करने के बाद बिहार में करीब 7,56,380 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता का पुनर्स्थापन हो सकेगा, जिससे लाखों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
किसानों की जुबानी

“मुख्यमंत्री नलकूप योजना के तहत कम खर्च में नलकूप की सुविधा और सब्सिडी मिलने से मुझे काफी आर्थिक लाभ हुआ है। छोटे किसानों के लिए यह काफी शानदार योजना है।”
ललित कुमार राम
किसान, सिवान
“पिछली बार धान की फसल काफी बेहतर हुई थी। इस बार गेहूं की फसल भी अच्छी हो रही है। पहले सिंचाई के लिए काफी समस्याएं होती थीं, लेकिन अब हर मौसम में हर खेत तक आसानी से पानी उपलब्ध हो रहा है। खेत में बोरिंग लगने से सिंचाई का पानी हर खेत तक पहुंच रहा है।”
मनोज कुमार, किसान
लगमा,सीतामढ़ी

“हर खेत तक सिंचाई का पानी’ कार्यक्रम के तहत जमुई जिले के सोनो प्रखंड में तालो आहर के जीर्णोद्धार से 40 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई क्षमता बहाल हुई है। इससे किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में सिंचाई का पानी उपलब्ध हो रहा है। खरीफ और रबी दोनों मौसमों में खेती को मजबूती मिल रही है, जिससे फसल उत्पादन और किसानों की आय में वृद्धि हो रही है।”
राजकुमार मंडल
स्थानीय किसान, जमुई




