
मोतिहारी। जिले के गन्ना किसानों और बेरोजगार युवाओं के लिए एक ऐतिहासिक और सुखद खबर है। राज्य सरकार ने पूर्वी चंपारण के पकड़ीदयाल प्रखंड स्थित चोरमा में नई चीनी मिल और डिस्टिलरी स्थापित करने के प्रस्ताव को अपनी हरी झंडी दे दी है। बिहार कैबिनेट की बैठक में 180 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी औद्योगिक परियोजना पर विधिवत मुहर लगा दी गई है। इस परियोजना के धरातल पर उतरने से न केवल चंपारण बल्कि नेपाल सीमा तक के किसानों की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आएगा और क्षेत्र में औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।5000 टीसीडी क्षमता का होगा प्लांटमिली जानकारी के अनुसार, इस विशाल परियोजना का निर्माण मेसर्स श्री गणेश शुगर मिल्स प्राइवेट लिमिटेड (कोलकाता) द्वारा किया जाएगा। कंपनी की ओर से चोरमा में करीब 180 करोड़ रुपये का भारी निवेश प्रस्तावित है। इसके तहत 5000 टीसीडी (टन क्रशिंग प्रतिदिन) पेराई क्षमता वाली एक अत्याधुनिक चीनी मिल स्थापित की जाएगी। इसके साथ ही, इथेनॉल और अन्य औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने के लिए 50 केएलपीडी (किलो लीटर प्रतिदिन) क्षमता की एक आधुनिक डिस्टिलरी इकाई का भी निर्माण होगा। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर इसके लिए कागजी कार्रवाई और आगे की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।किसानों को मिलेगा अपना बाजार, दूर होगी बिचौलिया प्रथाइस चीनी मिल के स्थापित होने से सबसे बड़ा फायदा अंचल के गन्ना किसानों को होगा। लंबे समय से क्षेत्र के किसान स्थानीय स्तर पर एक सुदृढ़ बाजार की मांग कर रहे थे। मिल के चालू होने से पकड़ीदयाल, मधुबन, चिरैया, ढाका, मोतिहारी सदर, शिवहर सहित सीमावर्ती नेपाल के तराई क्षेत्रों के गन्ना उत्पादकों को फसल बेचने के लिए अब दूसरे जिलों या दूर-दराज के क्षेत्रों में नहीं भटकना पड़ेगा। स्थानीय स्तर पर उपज की खपत होने से यातायात का खर्च बचेगा और गन्ने का समय पर उचित भुगतान भी सुनिश्चित हो सकेगा।हजारों युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के द्वारकृषि प्रधान इस क्षेत्र में बड़े उद्योग के अभाव में युवाओं का पलायन एक बड़ी समस्या रही है। चोरमा में इस कृषि आधारित उद्योग के लगने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संजीवनी मिलेगी। मिल और डिस्टिलरी के निर्माण से लेकर उसके संचालन तक में हजारों स्थानीय बेरोजगार युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।क्षेत्र में दौड़ी खुशी की लहरमधुबन और पकड़ीदयाल क्षेत्र में कृषि आधारित उद्योग की यह बहुप्रतीक्षित मांग पूरी होने पर स्थानीय किसानों और जनप्रतिनिधियों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। इसे पूर्वी चंपारण के औद्योगिक पुनर्जागरण के रूप में देखा जा रहा है। कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद से ही क्षेत्र के किसानों ने गन्ने की खेती के रकबे को बढ़ाने की दिशा में भी मन बनाना शुरू कर दिया है।



