
नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर पिछले 26 दिनों से अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आखिरकार अपना अनशन समाप्त कर दिया। शुक्रवार तड़के सामने आए वीडियो में वह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में जूस पीकर अनशन खत्म करते नजर आए। इस दौरान उनकी पत्नी गीतांजलि एंग्मो भी उनके साथ मौजूद थीं।
अनशन समाप्त होने के बाद केंद्र सरकार ने आंदोलनकारियों की कुछ प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया। सरकार ने भरोसा दिलाया कि संसद मार्च और जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। साथ ही संसद में पेपर लीक की घटनाओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर व्यापक चर्चा कराने का आश्वासन भी दिया गया। सरकार ने यह भी संकेत दिया कि नीट विवाद से प्रभावित परिवारों के लिए सहायता और मुआवजे के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा।
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई। सोशल मीडिया पर जारी संदेश में उन्होंने वांगचुक के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए डॉक्टरों की सलाह का पालन करने की अपील की।
प्रधानमंत्री ने हाल ही में अपने संबोधन में यह भी बताया था कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए नया कानून तैयार किया जा रहा है। प्रस्तावित विधेयक में प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कड़े दंड का प्रावधान किया जाएगा। सरकार इसे जल्द संसद में पेश करने की तैयारी में है।
अनशन समाप्त करने से पहले सोनम वांगचुक ने छात्रों और समर्थकों से पूरी तरह शांतिपूर्ण और अहिंसक आंदोलन जारी रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन किसी भी तरह की हिंसा आंदोलन के उद्देश्य को कमजोर करेगी।
वहीं उनकी पत्नी गीतांजलि एंग्मो ने आंदोलन में शामिल युवाओं की सराहना करते हुए कहा कि छात्रों ने पूरे आंदोलन के दौरान अनुशासन, सहयोग और जिम्मेदारी का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं का यह व्यवहार भविष्य के भारत के लिए उम्मीद जगाता है।
हालांकि वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है, लेकिन कई छात्र संगठनों ने संकेत दिए हैं कि शिक्षा सुधार और परीक्षा प्रणाली में बदलाव की मांग को लेकर आंदोलन आगे भी जारी रह सकता है। अब सभी की नजर संसद में होने वाली चर्चा और सरकार द्वारा लाए जाने वाले नए कानून पर टिकी है।



