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तेजस्वी के बयान पर भाजपा का पलटवार, राबड़ी देवी के कार्यकाल को बताया बिहार का काला अध्याय:

बिहार की राजनीति में एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की ओर से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर की गई टिप्पणी के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ा जवाब दिया है। भाजपा ने सिर्फ तेजस्वी यादव पर ही हमला नहीं बोला, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के कार्यकाल को भी निशाने पर लिया।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि अगर राजद को किसी पर टिप्पणी करनी है, तो पहले उसे अपने पुराने शासन को याद करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार के इतिहास में वह दिन अच्छा नहीं था, जब राबड़ी देवी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उनके मुताबिक राबड़ी देवी का पूरा कार्यकाल बिहार के लिए एक “काला अध्याय” रहा।

संजय सरावगी ने कहा कि उस समय बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति बहुत खराब थी। अपराध, अपहरण और भ्रष्टाचार जैसी घटनाएं आम बात थीं। उनका आरोप था कि उस दौर में विकास के काम ठप पड़ गए थे और राज्य की छवि पूरे देश में खराब हुई थी। उन्होंने कहा कि आज बिहार विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है और ऐसे समय में विपक्ष को बेबुनियाद बयान देने के बजाय जनता के मुद्दों पर बात करनी चाहिए।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर टिप्पणी करते हुए उन्हें “अंगूठा छाप” कह दिया। तेजस्वी के इस बयान के बाद भाजपा नेताओं ने इसे मुख्यमंत्री का अपमान बताया और कहा कि इस तरह की भाषा लोकतंत्र की गरिमा के खिलाफ है।

भाजपा नेताओं का कहना है कि किसी भी नेता की आलोचना तथ्यों और मुद्दों के आधार पर होनी चाहिए, न कि व्यक्तिगत टिप्पणी करके। उनका कहना है कि इस तरह के बयान केवल राजनीतिक माहौल को खराब करते हैं और जनता का ध्यान असली मुद्दों से हटाते हैं।

दूसरी ओर, राजद की ओर से भी भाजपा के आरोपों का जवाब दिया जा रहा है। राजद नेताओं का कहना है कि भाजपा अपनी सरकार की कमियों को छिपाने के लिए पुराने मुद्दों को बार-बार उठाती है। उनका दावा है कि जनता आज की समस्याओं पर जवाब चाहती है, न कि केवल अतीत की बातें सुनना।

बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों एक-दूसरे पर आरोप लगाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। ऐसे में नेताओं के बयान भी राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बनते जा रहे हैं।

फिलहाल तेजस्वी यादव की टिप्पणी और उस पर भाजपा की प्रतिक्रिया ने बिहार की राजनीति को फिर गरमा दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। वहीं, जनता की नजर इस बात पर रहेगी कि राजनीतिक दल आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था और विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर कितना ध्यान देते हैं।

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