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कोचिंग विवाद पर रामकृपाल यादव का तेजस्वी पर हमला, बोले- राजनीति करना बंद करें

पटना में दो प्रमुख कोचिंग संस्थानों के बीच शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। खान ग्लोबल स्टडीज के संचालक फैजल खान उर्फ खान सर और ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी के संचालक रौशन आनंद से जुड़े घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

कोचिंग विवाद के दौरान हुए हंगामे, पथराव और गोलीबारी की घटनाओं के बाद रौशन आनंद के भाई प्रिंस यादव की नेपाल में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। फिलहाल पूरे प्रकरण की जांच पुलिस कर रही है और मामला न्यायालय में भी विचाराधीन है।

इस बीच बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि घटना गंभीर है और निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए।

वहीं राज्य सरकार में मंत्री रामकृपाल यादव ने विपक्ष की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष की भूमिका केवल आरोप लगाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसे राज्य में बेहतर शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने में भी सहयोग करना चाहिए।

रामकृपाल यादव ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बिहार में शिक्षा का माहौल बेहतर हुआ है और अब गरीब तथा मध्यमवर्गीय परिवारों के छात्र भी अपने राज्य में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर पा रहे हैं। पहले बड़ी संख्या में छात्रों को कोटा, पुणे और अन्य शहरों का रुख करना पड़ता था, जिससे परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता था।

हालांकि उन्होंने यह भी माना कि कोचिंग संस्थानों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा अब गलत दिशा में जाती दिखाई दे रही है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र में असामाजिक तत्वों की घुसपैठ और व्यावसायिक स्वार्थों का प्रभाव बढ़ना चिंताजनक है।

मंत्री ने फैजल खान और रौशन आनंद के बीच विवाद को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे बिहार की छवि प्रभावित हो रही है और राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की नकारात्मक चर्चा हो रही है। उन्होंने शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों से अपील की कि वे जाति, धर्म और राजनीतिक विवादों से दूर रहकर छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता दें।

उन्होंने कहा कि शिक्षा को राजनीति का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा असर लाखों विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ता है।

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