
बिहार के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के अपर सदस्य संजीव हंस ने विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) द्वारा दर्ज किए गए मामले पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने निगरानी विभाग के अधिकारियों को एक पत्र लिखकर कहा है कि उन्हें जिस मामले में अभियुक्त बनाया गया है, वह उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के अनुसार सही नहीं है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की मांग की है।
संजीव हंस का कहना है कि उनके खिलाफ दर्ज एसवीयू थाना कांड संख्या-05/2025 में कई ऐसी बातें शामिल की गई हैं जो वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाती हैं। उन्होंने पत्र में लिखा है कि जांच एजेंसियों को किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों का सही तरीके से अध्ययन करना चाहिए। उनका मानना है कि निष्पक्ष जांच से सच्चाई सामने आ जाएगी।
अपने पत्र में संजीव हंस ने यह भी बताया कि रूपसपुर थाना कांड संख्या-18/2023 को आधार बनाकर ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मार्च 2024 में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया था। उनका कहना है कि जिस मामले की जांच पहले से अन्य एजेंसियों द्वारा की जा रही है, उसी आधार पर नए आरोप लगाए जा रहे हैं। इसलिए सभी तथ्यों की गहराई से जांच जरूरी है।
संजीव हंस ने कहा कि किसी भी सरकारी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करते समय कानून की प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की सत्यता की जांच पूरी निष्पक्षता के साथ होनी चाहिए ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी या भ्रम की स्थिति न बने।
उन्होंने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि जांच एजेंसियों का काम तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करना है और उन्हें भरोसा है कि निष्पक्ष जांच के बाद सही स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। संजीव हंस का कहना है कि उन्होंने हमेशा अपने प्रशासनिक दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन किया है और उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा विश्वास है।
इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है। कई लोग इस पूरे मामले की जांच के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल निगरानी विभाग और अन्य जांच एजेंसियां अपने स्तर पर मामले की जांच कर रही हैं।
संजीव हंस द्वारा लिखे गए पत्र के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसियां उनके द्वारा उठाए गए सवालों पर क्या जवाब देती हैं और आगे की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं। फिलहाल संजीव हंस ने साफ तौर पर कहा है कि उनके खिलाफ दर्ज मामला तथ्यों के अनुरूप नहीं है और निष्पक्ष जांच से पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी।



