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बिहार के दफ्तरों में अब वर्क फ्रॉम होम की तैयारी,CM सम्राट चौधरी के 7 बड़े फैसले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पेट्रोल और डीजल की बचत को लेकर की गई अपील का असर अब बिहार में भी दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई अहम फैसलों का ऐलान किया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि राज्य सरकार सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने और फ्यूल की खपत कम करने के लिए नई पहल शुरू कर रही है।

मुख्यमंत्री ने सबसे पहले अपने काफिले में शामिल गाड़ियों की संख्या घटाने का फैसला लिया है। अब जरूरत के हिसाब से ही वाहन उनके कारकेड में शामिल किए जाएंगे। वहीं मंत्रियों, अधिकारियों, बोर्ड-निगम के पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से भी सार्वजनिक कार्यक्रमों में कम वाहनों के इस्तेमाल की अपील की गई है।

सरकार ने आम जनता से भी मेट्रो, बस, ऑटो और अन्य पब्लिक यातायात का ज्यादा उपयोग करने की सलाह दी है। सरकार का मानना है कि इससे न सिर्फ ईंधन की बचत होगी बल्कि ट्रैफिक जाम और प्रदूषण में भी कमी आएगी।

इसके अलावा राज्य के सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि अधिकतर सरकारी बैठकें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित की जाएं, ताकि अधिकारियों और कर्मचारियों की अनावश्यक यात्रा कम हो सके।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सरकारी दफ्तरों की कैंटीन में पाम ऑयल का इस्तेमाल सीमित करने की बात भी कही है। साथ ही सरकारी और निजी संस्थानों में वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था को बढ़ावा देने की सलाह दी गई है, जिससे रोजाना लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम पड़े।

राज्य सरकार ने सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ मनाने की अपील भी की है। इसका मकसद लोगों को निजी वाहनों के कम इस्तेमाल के लिए प्रेरित करना है।

केंद्र सरकार की अपील के बाद बिहार सरकार के ये फैसले ईंधन बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकते हैं। खास बात यह रही कि बुधवार को कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इलेक्ट्रिक वाहन से पहुंचे, जबकि कई मंत्री भी बिना बड़े काफिले के एक ही गाड़ी में नजर आए।

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