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डीएम व पुलिस की मनमानी पर पटना हाई कोर्ट का चाबुक: ‘असामाजिक तत्व’ घोषित करने का आदेश रद्द, अफसरों की जेब से देना होगा जुर्माना

पटना। पुलिस की एक साधारण डायरी (सनहा) के आधार पर किसी नागरिक को ‘असामाजिक तत्व’ घोषित कर उसकी स्वतंत्रता छीन लेने वाले बांका के तत्कालीन जिलाधिकारी (डीएम) और पुलिस महकमे को पटना हाई कोर्ट ने करारा झटका दिया है। हाई कोर्ट ने प्रशासनिक मनमानी पर सख्त रुख अख्तियार करते हुए न केवल डीएम के अवैध आदेश को सिरे से निरस्त कर दिया है, बल्कि पीड़ित नागरिक को एक लाख 10 हजार रुपये का मुआवजा देने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि मुआवजे की यह भारी-भरकम राशि सरकार के खजाने से नहीं, बल्कि इस मनमानी के लिए जिम्मेदार दोषी अधिकारियों के वेतन से वसूली जाएगी। यह पूरा प्रकरण बांका जिले के कटोरिया निवासी गिरधारी यादव से जुड़ा है। चुनाव से ठीक पहले, स्थानीय पुलिस ने ‘बिहार अपराध नियंत्रण कानून, 2024’ का हवाला देते हुए कार्रवाई की। पुलिस ने आरोप लगाया कि दो मामलों में जमानत पर चल रहे गिरधारी यादव संदिग्ध लोगों के संपर्क में हैं और सार्वजनिक शांति भंग कर सकते हैं। पुलिस इंस्पेक्टर द्वारा दर्ज की गई इस अस्पष्ट स्टेशन डायरी (सनहा) को ही अकाट्य सत्य मानकर बांका के जिलाधिकारी ने 8 सितंबर 2025 को एक फरमान जारी कर दिया।

दोषी अफसरों से होगी वसूली, नौकरशाही के लिए बड़ा सबक

डीएम ने गिरधारी यादव को ‘समाज विरोधी तत्व’ घोषित करते हुए आदेश दिया कि वह चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक अपने घर से 40 किलोमीटर दूर स्थित बाराहाट थाने में जाकर बैठे। इस अलोकतांत्रिक आदेश के कारण पीड़ित को न सिर्फ भारी मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी, बल्कि उसे अपना रोजगार भी गंवाना पड़ा। जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस सुनील दत्ता मिश्रा की खंडपीठ ने इस आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने साफ कहा कि महज पुलिस की एक ‘सनहा’ का अपने आप में कोई साक्ष्य मूल्य नहीं होता। सिर्फ पुलिस अधिकारी के एक कोरे बयान और आधारहीन संदेह पर किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों को कुचला नहीं जा सकता।पीठ ने इस कार्रवाई को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार’ का घोर उल्लंघन करार दिया। न्यायालय ने टिप्पणी की कि पुलिस और कार्यपालिका को इस तरह की निरंकुश और असीमित शक्तियों के स्वेच्छाचारी इस्तेमाल की इजाजत कतई नहीं दी जा सकती।

अफसरों की जेब से देना होगा जुर्माना

न्याय के अधिकार की रक्षा करते हुए पटना हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिया है कि वह पीड़ित गिरधारी यादव को हुए नुकसान के एवज में 1,00,000 रुपये का मुआवजा और 10,000 रुपये कानूनी खर्च के तौर पर अदा करे।कोर्ट ने अपने फैसले में यह नजीर पेश की है कि यह भुगतान एक महीने के भीतर किया जाए और अगले छह महीने के अंदर इस पूरी राशि की वसूली उन लापरवाह पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों से की जाए, जिन्होंने कानून का दुरुपयोग किया। विधि विशेषज्ञों के अनुसार, हाई कोर्ट का यह फैसला उन नौकरशाहों के लिए एक कड़ा सबक है जो बिना ठोस सबूत के नागरिकों के अधिकारों का हनन करते हैं।

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