
बिहार में अब जमीन की रजिस्ट्री करना पहले से ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी होने जा रहा है। राज्य सरकार ने निबंधन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने की तैयारी की है, जिससे जमीन खरीदने वालों को राहत मिलेगी।
नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी जमीन की रजिस्ट्री से पहले खरीदार को उसकी पूरी जानकारी मिल जाएगी। यानी, जमीन विवादित है या नहीं—यह बात पहले ही स्पष्ट हो जाएगी।
मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग की ओर से इस संबंध में सभी जिलों के समाहर्ताओं को निर्देश जारी किए गए हैं। विभाग के उप निबंधन महानिरीक्षक डॉ. संजय कुमार ने साफ किया है कि अब प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाया जाएगा।
कैसे काम करेगी नई व्यवस्था ?
अब जमीन खरीदने से पहले आवेदक को संबंधित जमीन की पूरी जानकारी के साथ आवेदन करना होगा। इसके बाद अंचल अधिकारी यानी सीओ और राजस्व कर्मचारी 10 दिनों के अंदर जमीन की जांच कर रिपोर्ट तैयार करेंगे।
देनी होंगी ये जरूरी जानकारियां
आवेदक को जमीन से जुड़ी करीब 13 तरह की जानकारी देनी होगी, जिसमें खाता-खेसरा, मौजा, थाना, रकबा, चौहद्दी और रैयत का नाम जैसी अहम डिटेल शामिल होंगी।
फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक
इस जांच के बाद अगर जमीन में किसी तरह का विवाद होगा, तो वह रजिस्ट्री से पहले ही सामने आ जाएगा। इससे धोखाधड़ी और फर्जी रजिस्ट्री के मामलों पर रोक लगेगी।
अधिकारियों को मिलेगा प्रशिक्षण
इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए सभी सीओ और राजस्व कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह ट्रेनिंग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराई जाएगी, ताकि पूरे राज्य में इसे सही तरीके से लागू किया जा सके।
कुल मिलाकर, सरकार के इस फैसले से जमीन खरीदने वालों को बड़ी राहत मिलेंगी और रजिस्ट्री प्रक्रिया पहले से ज्यादा भरोसेमंद होगा |



