
पटना। बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के तबादले (स्थानांतरण) को लेकर शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने दो टूक बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में शिक्षकों की स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और नियमों के दायरे में होगी। तबादले केवल ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से होंगे और इसमें किसी भी नेता या अधिकारी की पैरवी, सिफारिश या व्यक्तिगत प्रभाव काम नहीं आएगा।मंगलवार को जारी एक बयान में शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा विभाग पूरी स्थानांतरण प्रक्रिया को निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रतिबद्ध है। विभाग की कोशिश है कि तबादलों में ऐसी पारदर्शिता हो कि किसी भी शिक्षक को भेदभाव का आरोप लगाने का कोई अवसर ही न मिले।उत्तर प्रदेश के मूल निवासी शिक्षकों की चिंताओं को दूर करते हुए शिक्षा मंत्री ने विशेष रूप से उन्हें आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि बिहार के सरकारी स्कूलों में जो भी यूपी के शिक्षक पढ़ा रहे हैं, उनके साथ किसी भी सूरत में भेदभाव नहीं किया जाएगा। मंत्री ने कहा, “यूपी के शिक्षक हमारे लिए पूजनीय हैं। वे हमारे राज्य के बच्चों का भविष्य गढ़ने का अहम काम कर रहे हैं। स्थानांतरण प्रक्रिया में उनके सम्मान और अधिकारों का पूरा ध्यान रखा जाएगा।”केवल नियमावली और पोर्टल ही होगा आधारशिक्षा मंत्री ने एक बार फिर दोहराया कि तबादले का आधार केवल ‘शिक्षक स्थानांतरण नियमावली’ और तय मानक ही होंगे। जो प्रक्रिया पोर्टल के लिए निर्धारित की गई है, उसी के तहत आवेदन स्वीकार किए जाएंगे और निर्णय लिए जाएंगे। किसी भी प्रकार की मैन्युअल सिफारिश या दबाव के आधार पर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा।



