
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित विवाद के बाद बिहार धार्मिक न्यास बोर्ड राज्य के मंदिरों में दान और चढ़ावे की व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं सुरक्षित बनाने की तैयारी में जुट गया है। बोर्ड की आगामी बैठक में पूरे बिहार के मठों और मंदिरों के लिए एक समान सुरक्षा और निगरानी प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव रखा जाएगा।
धार्मिक न्यास बोर्ड के सदस्य और पटना महावीर मंदिर के सचिव शायन कुणाल ने कहा कि श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखना बोर्ड की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से चढ़ावे की गिनती और उसकी सुरक्षा को लेकर नई व्यवस्था तैयार की जा रही है।
महावीर मंदिर की व्यवस्था बनेगी मॉडल
शायन कुणाल के अनुसार, पटना के महावीर मंदिर में दान पेटियों की गिनती पहले से ही तय प्रक्रिया के तहत की जाती है। हर गुरुवार और शनिवार को दान पेटियां खोली जाती हैं और पूरी प्रक्रिया पुलिस की मौजूदगी तथा सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में संपन्न होती है।
उन्होंने बताया कि गिनती शीशे से सुरक्षित कक्ष में की जाती है, जिससे श्रद्धालु भी पूरी प्रक्रिया देख सकें। इसके अलावा जल्द ही ऐसी व्यवस्था लागू होगी, जिसमें गिनती पूरी होते ही पूरी राशि सीधे बैंक खाते में जमा कर दी जाएगी, ताकि नकदी लंबे समय तक मंदिर परिसर में न रहे।
कीमती मूर्तियों की सुरक्षा पर भी रहेगा विशेष ध्यान
धार्मिक न्यास बोर्ड सिर्फ चढ़ावे की पारदर्शिता तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मंदिरों में स्थापित बहुमूल्य मूर्तियों की सुरक्षा को भी मजबूत किया जाएगा। शायन कुणाल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में अष्टधातु और अन्य कीमती मूर्तियों की चोरी की घटनाओं को देखते हुए प्रमुख मंदिरों में 24 घंटे सुरक्षा, आधुनिक सीसीटीवी नेटवर्क और स्थानीय पुलिस की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने की योजना बनाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि जिन मंदिरों में बहुमूल्य प्रतिमाएं हैं, वहां अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे। वहीं दान की गिनती मंदिर प्रशासन, स्थानीय प्रतिनिधियों और पुलिस की उपस्थिति में कराई जाएगी, ताकि पूरी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनी रहे।
राज्यभर के मंदिरों में लागू हो सकती है नई व्यवस्था
शायन कुणाल ने कहा कि अयोध्या की घटना के बाद मंदिर प्रबंधन में जवाबदेही और पारदर्शिता की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है। बिहार धार्मिक न्यास बोर्ड चाहता है कि राज्य के सभी मंदिरों में एक जैसी व्यवस्था लागू हो, जिससे चढ़ावे की गिनती और सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की अनियमितता की आशंका न रहे।
बोर्ड का मानना है कि आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था और पारदर्शी प्रक्रिया ही श्रद्धालुओं का विश्वास मजबूत रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है। इस प्रस्ताव पर होने वाली अगली बोर्ड बैठक में अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।



