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रीतलाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका: जमानत याचिका खारिज, हाईकोर्ट के फैसले में दखल से इनकार

बाहुबली रीतलाल यादव फिलहाल रहेंगे जेल में, सुप्रीम कोर्ट ने रंगदारी मामले में बेल देने से किया मना

पटना। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कद्दावर नेता और दानापुर से पूर्व विधायक रीतलाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने रंगदारी और संगठित अपराध से जुड़े एक बेहद गंभीर मामले में उन्हें जमानत देने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने पटना हाईकोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया है, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। इस फैसले के बाद यह तय हो गया है कि रीतलाल यादव को फिलहाल सलाखों के पीछे ही रहना होगा। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने तीन सितंबर को इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई की। रीतलाल यादव की ओर से जाने-माने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में दलीलें पेश कीं। हालांकि, पीठ ने उनके तर्कों को नाकाफी मानते हुए कहा कि मौजूदा चरण में पटना हाईकोर्ट के आदेश में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता है। पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह जल्द से जल्द आरोप (चार्ज) तय करने की दिशा में आगे बढ़े।

पटना हाईकोर्ट ने फरवरी में नामंजूर की थी अर्जी

शीर्ष अदालत ने पूर्व विधायक के लिए कानूनी राहत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं किए हैं। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि आरोप तय होने की तारीख से अगले एक साल के भीतर निचले कोर्ट (ट्रायल कोर्ट) की कार्यवाही में कोई ‘ठोस प्रगति’ नहीं होती है और आरोपी रीतलाल यादव मुकदमे की सुनवाई में जांच एजेंसियों व अदालत को पूरा सहयोग करते हैं, तो उनके पास विकल्प खुला रहेगा। ऐसी स्थिति में वह एक साल बाद जमानत के लिए दोबारा पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। गौरतलब है कि इससे पहले 26 फरवरी को पटना हाईकोर्ट ने भी अपराध की संगीनता को देखते हुए रीतलाल की जमानत याचिका को नामंजूर कर दिया था। यह पूरा मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 111(4), 111(6) और 111(7) के तहत दर्ज है, जो मुख्य रूप से ‘संगठित अपराध’ (Organized Crime) से संबंधित है।

कारोबारियों से रंगदारी वसूलने का है आरोप

जांच एजेंसियों के मुताबिक, राजद नेता कथित तौर पर एक बड़े संगठित गिरोह का हिस्सा हैं। आरोप है कि इस गिरोह के निशाने पर मुख्य रूप से पटना और आसपास के बड़े रियल एस्टेट कारोबारी और व्यवसायी रहते थे, जिन्हें डरा-धमकाकर भारी भरकम रंगदारी वसूली जाती थी। इसके अलावा, उन पर अपने आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक अवैध संपत्ति अर्जित करने का भी गंभीर आरोप है। इन्हीं सबूतों और आरोपों के आधार पर हाईकोर्ट ने उन्हें राहत देने से इनकार किया था। रीतलाल यादव की गिनती बिहार में राजद के प्रमुख और बाहुबली चेहरों में होती रही है। दानापुर और पटना के ग्रामीण इलाकों में उनका गहरा राजनीतिक प्रभाव माना जाता है। उन पर पहले भी कई आपराधिक मुकदमे दर्ज होने की बातें सामने आती रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस ताजा आदेश के बाद राजद खेमे में मायूसी है। अब सभी की निगाहें ट्रायल कोर्ट की आगामी कार्यवाही और आरोप तय होने की प्रक्रिया पर टिकी हैं।

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