
पटना। NEET-UG 2026 छात्र आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए जनशक्ति जनता पार्टी के प्रमुख तेजप्रताप यादव मंगलवार को पटना की बेऊर जेल से रिहा हो गए। तीन दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहने के बाद उनकी रिहाई सूबे की ‘सम्राट सरकार’ के एक बड़े फैसले के बाद संभव हो सकी है। राज्य सरकार ने छात्र आंदोलन के दौरान दर्ज हुए 64 मुकदमों को वापस लेने का निर्णय लिया है, जिससे तेजप्रताप समेत कई अन्य आंदोलनकारियों को बड़ी राहत मिली है।मंगलवार को जैसे ही तेजप्रताप यादव बेऊर जेल से बाहर आए, वहां पहले से मौजूद बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उनका भव्य स्वागत किया। जेल परिसर के बाहर ‘तेजप्रताप जिंदाबाद’ के नारों के बीच उन्हें फूल-मालाओं से लाद दिया गया।
हालांकि, रिहाई के बाद उन्होंने मीडिया के तीखे सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। वे सिर्फ हाथ जोड़कर अपने समर्थकों का अभिवादन करते हुए वहां से रवाना हो गए।सूत्रों के अनुसार, सरकार द्वारा छात्र आंदोलन के मुकदमों को वापस लेने के नीतिगत फैसले के तहत तेजप्रताप यादव के खिलाफ दर्ज एफआईआर (कांड संख्या 420/26) को भी निरस्त कर दिया गया है। इसी के चलते उनके जेल से बाहर आने का कानूनी मार्ग प्रशस्त हुआ।सरकार के इस फैसले को जमीन पर उतारने के लिए त्वरित कार्रवाई की जा रही है। राज्य के महाधिवक्ता एसडी संजय ने गृह विभाग के निर्देशों के आलोक में सूबे के 19 जिलों के जिलाधिकारियों (DM) को नोटिस जारी किया है। प्रमुख जिले: इनमें पटना, सीवान और सारण जैसे संवेदनशील जिले शामिल हैं।
इस निर्देश के माध्यम से कुल 64 मुकदमों को वापस लेने की वैधानिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। गौरतलब है कि इस पूरे विवाद की शुरुआत बीते 24 जुलाई को हुए उग्र छात्र विरोध प्रदर्शन से हुई थी। उस दिन पटना के गांधी मैदान थाने में तेजप्रताप यादव को नामजद अभियुक्त बनाते हुए एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके तुरंत बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। महज तीन दिनों के भीतर केस वापसी और रिहाई के इस घटनाक्रम को राजनीतिक जानकार बेहद अहम मान रहे हैं।



