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मौत बनकर ढहा अंग्रेजों के जमाने का जर्जर पुल: 13 वर्षीय किशोर की दर्दनाक मौत, रेस्क्यू करने गई पुलिस और मुखिया भी दबे

मोतिहारी । जिले के सिकारगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत भगवतपुर भलुआहिया गांव में रविवार का दिन एक बड़े हादसे के साथ मातम में बदल गया। यहां कछुआ नदी पर बना ब्रिटिश कालीन पुराना पुल अचानक भरभरा कर ढह गया। इस खौफनाक हादसे में घास काटने जा रहे लोगों में से एक 13 वर्षीय किशोर की मलबे में दबकर दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 11 अन्य ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे की भयावहता यहीं खत्म नहीं हुई। सूचना मिलने पर जब पुलिस और प्रशासन की टीम ग्रामीणों के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही थी, तभी पुल का एक और बड़ा हिस्सा टूटकर गिर पड़ा। इसकी चपेट में आकर सिकारगंज के थानाध्यक्ष गोपाल कुमार और स्थानीय मुखिया भी घायल हो गए। घायलों को मोतिहारी के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद गांव में हाहाकार मचा है और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश है।

मौत का सफर बन गई घास काटने की दिनचर्या

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रविवार की सुबह रोजमर्रा की तरह भगवतपुर भलुआहिया और आसपास के कुछ ग्रामीण कछुआ नदी के उस पार घास काटने के लिए निकले थे। नदी पार करने के लिए वे उसी जर्जर पुल का इस्तेमाल कर रहे थे। जब लोगों का समूह पुल के बीचों-बीच पहुंचा, तभी अचानक एक तेज आवाज आई और पुल का एक बड़ा हिस्सा धंस गया। किसी को संभलने या भागने तक का मौका नहीं मिला। पुल के टूटते ही लोग भारी मलबे के साथ सीधे कछुआ नदी में जा गिरे। चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। आवाज सुनकर खेतों में मौजूद ग्रामीण दौड़कर मौके पर पहुंचे और जान जोखिम में डालकर नदी में गिरे लोगों को निकालने लगे। इसी बीच शंभु महतो के 13 वर्षीय पुत्र की जान चली गई। बेटे की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया।

प्रशासनिक अनदेखी पर उठे गंभीर सवाल

हादसे की सूचना मिलते ही सिकारगंज थानाध्यक्ष गोपाल कुमार तुरंत दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। उनके साथ स्थानीय मुखिया और अन्य लोग भी मौजूद थे। पुलिस और ग्रामीण मिलकर मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए तेजी से राहत और बचाव कार्य चला रहे थे। तभी वहां एक और हादसा हो गया। जर्जर पुल का बचा हुआ एक और हिस्सा अचानक भरभरा कर नीचे आ गिरा। मलबे को हटाने में जुटी रेस्क्यू टीम भी इसकी चपेट में आ गई। गनीमत यह रही कि इस दूसरे हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन थानाध्यक्ष गोपाल कुमार और मुखिया सहित कई बचावकर्मी घायल हो गए। आनन-फानन में सभी घायलों को ढाका अस्पताल ले जाया गया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें मोतिहारी रेफर कर दिया गया।

इस हृदयविदारक घटना ने सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह पुल वर्षों से जर्जर अवस्था में था। इसकी खस्ताहालत के बारे में कई बार शिकायत की गई, लेकिन मरम्मत या इसे खतरनाक घोषित कर बंद करने की कोई ठोस पहल नहीं की गई। उसी लापरवाही का नतीजा है कि आज एक हंसता-खेलता बच्चा काल के गाल में समा गया। सिकारगंज थानाध्यक्ष गोपाल कुमार ने बताया, “पुल ध्वस्त होने की सूचना पर पुलिस तत्काल पहुंची थी। बचाव कार्य के दौरान ही पुल का दूसरा हिस्सा गिरा। फिलहाल सभी घायलों का इलाज मोतिहारी के निजी अस्पताल में चल रहा है।” पूरे गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है और हर आंख नम है।

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