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पैसे-नौकरी नहीं, बेटे के लिए न्याय और शहीद का दर्जा चाहिए: भरत तिवारी की मां

पटना। भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में परिवार ने सरकार द्वारा घोषित आर्थिक मदद और सरकारी नौकरी के ऐलान से इतर अपनी सबसे बड़ी मांग स्पष्ट कर दी है। भरत तिवारी की मां आशा देवी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि उन्हें सरकार के पैसे या नौकरी से ज्यादा अपने बेटे के लिए न्याय चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने सरकार से भरत तिवारी को ‘शहीद’ का दर्जा देने की पुरजोर मांग की है।स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भरत तिवारी के घर के बाहर परिजनों और ग्रामीणों की मौजूदगी में तिरंगा फहराकर सलामी दी गई। इसी दौरान भावुक परिजनों ने एक बार फिर न्याय की गुहार लगाई। मां आशा देवी ने स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की घोषणा अपनी जगह है, लेकिन उनकी पहली प्राथमिकता अपने बेटे को इंसाफ दिलाना है।मां आशा देवी के साथ-साथ भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी ने भी सरकार के ऐलान का स्वागत करते हुए स्पष्ट किया कि उनका मुख्य एजेंडा न्याय ही है। परिवार का कहना है कि मामले में जिन पुलिस अधिकारियों और कर्मियों पर गंभीर आरोप हैं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। जो आरोपित अब तक बाहर हैं, उनकी तत्काल गिरफ्तारी हो।

परिजनों का जोर अब मुआवजे से ज्यादा जांच और दोषियों पर कार्रवाई के नतीजे पर है।विदित हो कि इस एनकाउंटर मामले की जांच न्यायिक जांच आयोग कर रहा है। आयोग द्वारा बिहार सरकार को अंतरिम रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने परिवार के लिए मुआवजे और नौकरी की घोषणा की थी। अब पूरे मामले की तस्वीर बदल गई है और परिवार की निगाहें सरकार की अगली कार्रवाई पर टिक गई हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अंतरिम रिपोर्ट के बाद क्या सरकार परिवार की ‘शहीद का दर्जा’ देने की मांग को स्वीकार करेगी?

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