newspatnaबिहार

बागमती ने चार दिन बाद उगला एक युवक का शव, दूसरे की तलाश जारी

मोतिहारी। पूर्वी चंपारण जिले के देवापुर-बेलवा बागमती-लालबक्या नदी संगम घाट पर आस्था के महापर्व सावन की प्रथम सोमवारी को हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। चार दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद गुरुवार को बागमती नदी से एक युवक का शव बरामद कर लिया गया, जबकि दूसरे का अब भी कोई सुराग नहीं लग सका है। विडंबना यह रही कि एनडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों की टीम चार दिन तक नदी की खाक छानने के बाद जब वापस लौटी, उसके कुछ ही देर बाद युवक का शव उसी घाट के समीप उतराता हुआ मिला, जहां वह डूबा था।स्थानीय नाविकों ने नदी में उतराते शव को देखकर उसे बाहर निकाला। सूचना मिलते ही बदहवास परिजन मौके पर पहुंचे। मृतक की पहचान लालबेगिया निवासी उमाकांत यादव के पुत्र कमलेश कुमार उर्फ चवन्नी के रूप में हुई। शव देखते ही परिजनों की चीख-पुकार से पूरा संगम घाट गूंज उठा और लालबेगिया गांव में मातमी सन्नाटा पसर गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि प्रथम सोमवारी की रात करीब 12:30 बजे हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच कमलेश और उसका साथी रौशन कुमार उर्फ बोल्टेजवा (पिता- रमेश प्रसाद यादव) जल भर रहे थे।

इसी दौरान पैर फिसलने से दोनों गहरे पानी में चले गए और तेज बहाव में बह गए।हादसे के तुरंत बाद पूर्वी चंपारण और शिवहर जिला प्रशासन ने संयुक्त रूप से राहत व बचाव कार्य शुरू किया था। लगातार चार दिनों तक एनडीआरएफ, स्थानीय गोताखोरों और प्रशासनिक टीम ने नदी के चप्पे-चप्पे को खंगाला, लेकिन उन्हें कोई सफलता नहीं मिली। गुरुवार को कमलेश का शव मिलने के बाद अब पूरे प्रशासन और ग्रामीणों की निगाहें दूसरे युवक रौशन की तलाश पर टिक गई हैं। पकड़ीदयाल की अनुमंडल पदाधिकारी मंगला कुमारी ने स्वयं संगम घाट पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और पीड़ित परिवारों को हरसंभव प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। इस हृदयविदारक घटना ने देवापुर-बेलवा संगम घाट की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। हर सोमवारी यहां आस्था का जनसैलाब उमड़ता है और हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। लेकिन, घाट पर न तो पर्याप्त बैरिकेडिंग की व्यवस्था है, न गहरे पानी को दर्शाने वाले कोई स्पष्ट चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं और न ही किसी स्थायी बचाव दल की तैनाती है। ऐसे में ग्रामीणों का सवाल लाजिमी है कि क्या प्रशासन किसी और बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? स्थानीय लोगों ने मांग की है कि आगामी सोमवारी से पहले घाट पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं, ताकि आस्था के इस संगम पर फिर किसी परिवार की खुशियां न उजड़ें।

Related Articles

Back to top button