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बिहार में औद्योगिक क्रांति: गन्ना मंत्री का बड़ा एलान, बंद चीनी मिलें खोलने को मिली मंजूरी

बिहार के औद्योगिक और कृषि क्षेत्र के इतिहास में आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। सूबे के गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने एक प्रेस वार्ता के दौरान राज्य के लिए बड़े और ऐतिहासिक फैसलों का एलान किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में वर्षों से बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने और एक ‘मॉडल कॉम्प्लेक्स शुगर मिल’ की स्थापना के क्रांतिकारी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस दूरगामी नीति के लागू होने से बिहार देश का ऐसा पहला राज्य बनने जा रहा है, जहां चीनी मिल परिसरों में चीनी के साथ-साथ सीबीजी (कंप्रेस्ड बायोगैस), एथेनॉल और बिजली का उत्पादन एक साथ (एकीकृत ढांचे में) किया जाएगा।नवंबर में पीएम मोदी करेंगे शिलान्यासगन्ना मंत्री ने एक बड़ा अपडेट देते हुए बताया कि राज्य में बंद पड़ी चीनी मिलों के दिन अब बहुरने वाले हैं। सरकार ने इस साल के अंत तक कम से कम पांच चीनी मिलों के पुनरुद्धार की प्रक्रिया को धरातल पर उतारने का पक्का लक्ष्य रखा है।

आगामी नवंबर महीने में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं बिहार के दौरे पर आएंगे और इन आधुनिक चीनी मिलों की स्थापना व आधुनिकीकरण की आधारशिला (नींव) रखेंगे।निवेशकों के लिए सरकार ने बिछाया ‘रेड कारपेट’बिहार सरकार ने राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने के लिए अपनी नई शुगरकेन (गन्ना) नीति के तहत बेहद उदार और ऐतिहासिक रियायतों की घोषणा की है:₹1 के टोकन पर 30 साल की लीज: नई नीति के तहत मिलों की स्थापना के लिए निवेशकों को 30 वर्षों की लंबी अवधि के लिए जमीन लीज पर दी जाएगी। इसके एवज में निवेशकों से महज 1 रुपये की टोकन मनी ली जाएगी।₹70 करोड़ तक की भारी सरकारी सहायता: राज्य में न्यूनतम 3,500 टीसीडी (टन क्रशिंग पर डे) क्षमता वाली नई चीनी मिल स्थापित करने पर सरकार द्वारा 70 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी, जो 5 आसान किस्तों में मिलेगी।

क्षमता विस्तार पर अतिरिक्त बोनस: यदि कोई निवेशक 3,500 टीसीडी क्षमता से ऊपर मिल का विस्तार करता है, तो उसे प्रत्येक अतिरिक्त 100 टीसीडी की क्षमता पर 2 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सरकारी मदद दी जाएगी।100% निबंधन शुल्क की प्रतिपूर्ति: उद्यमियों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने एलान किया है कि नई चीनी मिल की स्थापना या वर्तमान मिलों के क्षमता विस्तार के लिए खरीदी जाने वाली भूमि पर लगने वाले निबंधन शुल्क (रजिस्ट्रेशन फीस) की शत-प्रतिशत (100%) राशि की प्रतिपूर्ति राज्य सरकार खुद करेगी।आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदमगन्ना मंत्री संजय कुमार के अनुसार, इस नए और आधुनिक मॉडल से राज्य में ऊर्जा और ईंधन के क्षेत्र में बड़ा आत्मनिर्भर बदलाव आएगा। इस नीतिगत छूट से निवेशकों पर शुरुआती वित्तीय बोझ काफी कम हो जाएगा और बिहार में बहुत जल्द बंद पड़ी चीनी मिलें पूरी क्षमता के साथ धड़कने लगेंगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के लाखों नए अवसर सृजित होंगे।

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