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पत्रकारिता महज पेशा नहीं, समाज के प्रति एक मिशन: राकेश प्रवीर

पटना। महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय (एमजीसीयू), बिहार के मीडिया अध्ययन विभाग के तत्वावधान में शनिवार को ‘नवोन्मेष-2026’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के बृहस्पति सभागार में आयोजित इस अकादमिक विमर्श का मुख्य विषय ‘पत्रकारिता का बदलता स्वरूप, तकनीकी बदलाव और मीडिया का सामाजिक दायित्व’ रहा। कार्यक्रम में देश के ख्यातिलब्ध पत्रकारों और शिक्षाविदों ने मीडिया के छात्रों को वर्तमान दौर की चुनौतियों, तकनीकी बदलावों और अवसरों से विस्तार से अवगत कराया। अकादमिक सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत कर रहे वरिष्ठ पत्रकार राकेश प्रवीर ने अपने संबोधन में कहा कि पत्रकारिता को सिर्फ रोजगार या करियर का माध्यम नहीं माना जाना चाहिए। यह समाज और जनमानस के प्रति जिम्मेदारी से जुड़ा एक पवित्र मिशन है। अपनी चर्चित पुस्तक ‘थारू जाति’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने अपने जमीनी अनुभव साझा किए। श्री प्रवीर ने 30 मई को ‘उदंत मार्तंड’ के प्रकाशन से शुरू हुए हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास को रेखांकित किया। उन्होंने प्रख्यात पत्रकार सुरेंद्र किशोर के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि पत्रकारिता सिर्फ लेखन या वाचन की कला नहीं है, बल्कि इसके मूल में त्याग और बलिदान की भावना निहित होती है। यह समाज का मार्गदर्शन करने के साथ-साथ जनमत निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने छात्रों से अपनी क्षमता को लगातार विकसित कर आत्मनिर्भर बनने का भी आह्वान किया।

जनमत निर्माण में मीडिया की अहम भूमिका

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता व वरिष्ठ पत्रकार आलोक कुमार मिश्रा ने बदलते मीडिया परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में केवल पारंपरिक पत्रकारिता का ज्ञान पर्याप्त नहीं रह गया है। आज की नई पत्रकारिता तकनीकी कौशल के बिना पूरी तरह अधूरी है। उन्होंने भावी पत्रकारों को वीडियो निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और सोशल मीडिया जैसे आधुनिक कौशल पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। श्री मिश्रा ने कहा कि सोशल मीडिया के इस दौर में सक्रिय रहकर छात्र अपनी ‘व्यक्तिगत ब्रांड वैल्यू’ विकसित कर सकते हैं। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे केवल कक्षाओं तक सीमित न रहें, बल्कि ऑफ-कैंपस जाकर व्यावहारिक अनुभव भी अवश्य हासिल करें।

‘सत्यम, शिवम, सुंदरम’ की अभिव्यक्ति है मीडिया

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मीडिया अध्ययन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अरुण कुमार भगत ने कहा कि पत्रकारिता शोषितों, पीड़ितों और प्रताड़ितों की मुखर आवाज है। इसकी बुनियाद सामाजिक सरोकारों पर टिकी है और यह सही मायनों में ‘सत्यम, शिवम, सुंदरम’ की अभिव्यक्ति है। उन्होंने छात्रों को बदलते दौर के साथ कदमताल करने, नई तकनीक सीखने और अनुशासन के साथ सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया। इससे पूर्व, विभाग के वरिष्ठ सह-आचार्य डॉ. अंजनी कुमार झा ने स्वागत भाषण प्रस्तुत कर छात्रों को मीडिया जगत के व्यापक अवसरों की जानकारी दी तथा लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की सलाह दी। इस अवसर पर अतिथियों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में आयोजन सचिव डॉ. साकेत रमण, प्राध्यापक डॉ. सुनील दीपक घोडके, डॉ. उमा यादव और डॉ. मयंक भारद्वाज सहित बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे। मंच का सफल संचालन छात्र नितिश एवं आर्या ने संयुक्त रूप से किया, जबकि शोधार्थी विनय कुमार यादव ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

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